Tuesday, September 14, 2010
Thursday, September 9, 2010
Sunday, June 27, 2010
NEGI-SIMPLY-BOY---!

सबसे पहले में भारतीय हूँ और उत्तराखंड {देवभूमि} मेरी जन्म भूमि हे ! बर्तमान में दिल्ली में हूँ जो मेरी कर्म भूमि है ! मैं अपनी मातृ-भूमि, पितृ-भूमि, धर्म-भूमि कर्म-भूमि उत्तराखंड से प्यार करता हूँ ! मुझे गर्व है के हमने अपनी इस भूमि मैं सब कुछ पाया है. समस्त देवताओं की तपोभूमि, अच्छे संस्कार, अच्छे माता- पिता, सीडीदार खेत, दादी माँ का वो पहनावा, वो पैतृक मकान, वो काफल का फल, वो बुरांस का फूल और ना जाने कितनी ही अमूल्य चीजें. क्या में इन्हें भूल सकता हूँ नहीं. और अगर भूल गए हो तो शायद मुझे अपनी सभ्यता से प्यार नहीं... एक समान्य आदमी की तरह जिन्दगी जीने वाला, किन्तु सोच थोड़ा हट के। मित्रता कम ही करता हूँ जिससे करता हूँ, बिन्दास करता हूँ। सच में दोस्ती के मायने समझने की कोशिस कर रहा हूँ कि दोस्ती कहते किसे है? क्या आपस मे बात करना और गप्पे मारना या किसी अच्दे होटल या रेस्त्रां मे जा कर साथ जीभ के स्वाद में वृद्धि करना, यही दोस्ती है? KEDAR SINGH NEGI PAITHANI PAURI GARHWAL DEHRADUN UTTARAKHAND (UK)-246123 MO.NO +918010596431
Thursday, June 10, 2010
k. s Negi bole to kedar again???
Kedar "Negi" G

म्यारू प्यारु गढ़वाल थेकी कैकि नज़र लग गयाई
Negi G............8010596431
हसदा छा जख मन्खी ये रोये कख बटे आयी
म्यारू प्यारु ———————————
दुध बगदू छा जख धारू कख बटे आयी
यौ शांति का बाटा मा कलह क्यों ले आयी
छोड़ीकी अपड़ा ,प्यारु गढ़वाल
कख जाणा भुलों, कख जाणा दगडियो
म्यारू प्यारु ————————-
कुड़ो मा लगना ताला,पुगाड़ो मा जमडा घास
आलु मयारू नोऊनु ,बोडी लगाड़ी च आस
बाट दिखदा -दिखादा मा का आँख थक गैनी
म्यारा नोना जया परदेस क्याकू वापस नि एनी
म्यारू प्यारु ———————————
चुचों अपड़ा प्यारु गढ़वाल म तुमन क्या नी पाई
कूड छ पुगंडी छा ,क्याकू रास नि आयी
सब कुछ त छई तुममा क्या नि छाई
क्याकू अपणु प्यारु गढ़वाल छोड़ीकी ,मंन्खी भेरा ग्येंनी
म्यारू प्यारु गढ़वाल थेकी कैकि नज़र लग गयाई
हसदा छा जख मन्खी ये रोये कख बटे आयी
म्यारू प्यारु गढ़वाल थेकी ये केकी नज़र लग गयी
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