नानघाट से भी नहीं बुझेगी पौड़ी की प्यासApr 30, 10:12 pmबताएं
Twitter Delicious Facebook पौड़ी गढ़वाल। पौड़ी की प्यास कब बुझेगी, लंबे समय से पेयजल किल्लत से जूझ रहे गढ़वाल मंडल मुख्यालय को लेकर उठने वाले इस सवाल का जवाब शासन-प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों ने यही दिया है 'नानघाट योजना के बनते ही'। यही वजह है कि इस योजना को लेकर पौड़ीवासियों ने भी उम्मीदें बांध ली हैं, लेकिन कड़वी सचाई यह है कि बहुप्रतीक्षित यह योजना भी पौड़ी की प्यास नहीं बुझा सकती। दरअसल, योजना बनने के बाद भी पौड़ी को करीब दो एमएलडी पानी की जरूरत होगी। उधर, योजना को लेकर विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसीसे लगाया जा सकता है कि सात साल में योजना का इस्टीमेट तीन बार बढ़ाया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक महज चालीस फीसदी काम ही पूरा हो सका है।
पौड़ी में पेयजल संकट को देखते हुए वर्ष 2003 में नानघाट पेयजल योजना को स्वीकृति मिली। तब योजना की लागत 43 करोड़ 57 लाख रुपये आंकी गई, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया। वर्ष 2006 में योजना का निर्माण शुरू हुआ और वाल्व एंड फिटिंग की सप्लाई के लिए विभाग ने टेंडर आमंत्रित किए। हैरत की बात यह रही कि शर्तो को पूरा न करने के बावजूद बरेली की एक फर्म यूपी सेल्स को टेंडर दे दिया गया। फर्म ने पैसा लेकर भी सप्लाई नहीं दी, तो जांच हुई। इसमें अधिशासी अभियंता जल निगम आरजे सिंह, अधीक्षण अभियंता किशनलाल समेत तीन अधिकारियों के विरुद्ध सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। दोबारा योजना का निर्माण शुरू होने पर जल निगम ने वर्ष 2007 में पुन: 67 करोड़ का इस्टीमेट शासन को भेजा। वर्ष 2008 में निगम ने इस्टीमेट फिर बढ़ाकर 79 करोड़ कर दिया है। योजना को दिसंबर, 2010 तक पूरा होना है, लेकिन अब तक 38 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी योजना का महज चालीस प्रतिशत काम हुआ है। चिंता की बात तो यह है कि योजना बनने के बाद इससे 4.66 एमएलडी पानी मिलेगा, जबकि मांग 6 एमएलडी की है। यानी योजना के बाद भी पौड़ी को दो एमएलडी पानी की दरकार होगी। जिलाधिकारी दिलीप जावलकर कहते हैं कि योजना निर्माण में देरी और अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, विधायक यशपाल बेनाम कहते हैं कि योजना में लापरवाही बरती गई, तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं, मुख्य अभियंता जल निगम विजय कुमार मित्तल बताते हैं कि योजना का निर्माण निर्धारित समय पर पूरा करने की कोशिशें जारी हैं। योजना के पाइप, वाल्व और अन्य उपकरणों की खरीददारी पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने जवाब न देते हुए कहा कि इस बारे में शासन स्तर पर ही बात करें।
Friday, April 30, 2010
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